क्या सर्जरी से हो सकता है हड्डियों के टेढ़ेपन का इलाज ? जानिए क्या है एक्सपर्ट्स की राय

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हड्डियों के टेढ़ेपन से जूझ रहे व्यक्ति अक्सर स्पाइनल कॉर्ड में होने वाले सर्जरी से परेशान रहते है | लेकिन मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी ही एकलौता ऐसा सर्जरी है, जिसकी सहयता से हड्डियों के टेढ़ेपन जैसी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है | मिनिल इनवेसिव टेक्नोलॉजी की जानकारी बहुत कम लोगों के पास  है, जिसके चलते कई लोग अपना इलाज करवाने से भी डरते है | 

कन्वेशल स्पाइन सर्जरी के मुकाबले में एम आई एस एस तकनीक से हुई सर्जरी ज्यादा लाभ देती है | इस तकनीक की सहायता से स्पाइनल कॉर्ड की सर्जरी के साथ-साथ वर्टिब्रल सर्जरी करना भी शामिल है | मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी का सक्सेस रेट करीब 90 प्रतिशत है | 

हुन्जुन हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉक्टर बलवंत सिंह हुन्जुन जो की ऑर्थोपेडिक के एक्सपर्ट है, उन्होंने ने बताया की कैसे इस तकनीक की सहायता से हड्डियों के टेढ़ेपन से छुटकारा पाया जा सकता है | आइये जानते है क्या है  एक्सपर्ट्स की राय 

क्या है  मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी ? 

डॉक्टर बलवंत सिंह हुन्जुन के अनुसार कन्वेशल स्पाइन सर्जरी की तुलना में  मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी ज्यादा सुरक्षित रहती है और हड्डियों को ठीक में होने ज़्यादा समय भी नहीं लगता | इस सर्जरी के बाद किसी भी तरह के परेशानी के उत्पन होने का खतरा भी बहुत कम होता है | 

मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी के दौरान सर्जन अनुक्रमत्व विस्तार द्वारा मरीज़ के पीठ की मासपेशियों के जरिये एक नली बनता है, जिससे कोशिका नष्ट हो जाती है और दर्द भी कम होता है | लेकिन कन्वेशल स्पाइन सर्जरी में मरीज़ के वर्टिब्रे टुकड़े की मासपेशियां को ही निकल दिया जाता है | 

मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी के ऑपरेशन के बाद आये निशान बहुत काम होते है या फिर एक माप से भी  छोटे होते है, वही इससे विपरीत कन्वेशल स्पाइन सर्जरी के ऑपरेशन के बाद काफी बड़ा निशान रह जाता है | 

मिनिमल इनवेसिव स्पाइनल सर्जरी की किया जाता है हड्डियों के टेढ़ेपन का इलाज 

एम आई एस एस  हड्डियों के टेढ़ेपन से झूझ रहे हर मरीज़ के लिए पूर्ण नहीं होता | इस सर्जरी को व्यक्तिगत के अनुसार ही मूल्याकंत किया जाता है और मरीज़ को परामर्श दिया जाता है | यदि डॉक्टर ने मरीज़ को पीढ़ी दर पीढ़ी होने वाले इस समस्या की  खुली धारणा का प्रमाण दे दिया है तो इसका मतलब यह नहीं की इस समस्या को ठीक होने में बहुत लम्बा समय लगेगा या फिर बहुत कष्टदाय होगा | इससे लिए मरीज़ को इस उप्लाब्दों के बारे में खुद को शिक्षिक करना चाहिए ताकि वह मरीज़ डॉक्टर के साथ अपने विकल्पों पर विचार विमर्श कर सके और स्वंय के सही विकल्पों का चुनाव कर सके | 

एम आई एस एस लाभ क्या है ?  

कन्वेशल स्पाइन सर्जरी के मुकाबले एम आई एस एस के ज्यादा लाभ है | 

  • सर्जरी के बाद किसी भी प्रकार की कमजोरी का न आना 
  • समस्या से जल्दी से ठीक हो जाना  
  • हॉस्पिटल में ज्यादा दिन तक भर्ती न रहना 
  • रोग मुक्त हो जाना 
  • ऑपरेशन के बाद न्यूमतन निशान का रहना 
  • ऑपरेशन के बाद संक्रमण या फिर कोई भी दुष्प्रभाव ना होना 
  • कम से कम कोशिकाएं का नष्ट होना, जिसे दर्द भी बहुत कम होता है 

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